उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (यू0पी0एस0आई0डी0सी0) द्वारा अपनी स्थापना दिनांक 29 मार्च, 1961 से अब तक उत्तरोत्तर विकास के नये-नये कीर्तिमान स्थापित किये गये है। उद्योग निदेशालय के एक छोटे से कक्ष व गिनती के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ नन्हें से पौधे के रूप में आरम्भ कर 55 वर्ष का अन्तराल तय करके यह संस्थान एक विशाल वटवृक्ष बन गया है जिसकी छाया में 97 अधिकारी व 900 कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। उ0 प्र0 शासन द्वारा प्रदत्त कुशल प्रबन्धन व नेतृत्व तथा सभी के अथक परिश्रम व सहयोग के कारण निगम अपने स्थापना वर्ष से ही लाभ अर्जित करता रहा है। निगम अपने 55 वर्ष के कार्यकाल में प्रवेश करते हुये 50 जिलों में 150 से भी अधिक औद्योगिक क्षेत्र स्थापित कर चुका है जिसमें लगभग 30900 एकड़ हेक्टेयर भूमि विकसित की गई है जिसके कारण प्रदेश में संतुलित औद्योगिक विकास हो रहा हैं। अब तक निगम के औद्योगिक क्षेत्रों में कुल 11833 इकाईयाँ कार्यरत् हैं।

यू0पी0एस0आई0डी0सी0 के महत्वपूर्ण कार्यो में औद्योगिक विकास सुनिश्चित करने हेतु भूमि का चयन एवं अधिग्रहण किया जाना, आवश्यक एवं उच्चस्तरीय औद्योगिक अवस्थापना सुविधाओं से युक्त औद्योगिक क्षेत्रों का विकास, अवस्थापना से सम्बन्धित परियोजनाओं का चिन्हीकरण तथा उनके विकास हेतु प्रोत्साहित करना तथा सार्वजनिक एवं अर्द्धसार्वजनिक प्रतिष्ठानों के लिए सिविल निर्माण कार्य करवाना सम्मिलित है।

उ0प्र0 सरकार की दूरदर्शी अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति-2012 को पूर्ण रूप से अंगीकृत करते हुये यू0पी0एस0आई0डी0सी0 द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में कई नई परियोजनाओं का शुभारम्भ किया गया है जिसमें ट्रांस गंगा परियोजना-उन्नाव, सरस्वती हाई-टेक सिटी-इलाहाबाद, प्लास्टिक सिटी-औरेया तथा मेगा लेदर क्लस्टर परियोजना, रमईपुर-कानपुर के बाद परफ्यूम पार्क कन्नौज तथा थीम पार्क आगरा को प्रमुख रूप से विकसित किया जा रहा हैं। इसके अतिरिक्त भारत सरकार की अत्यन्त महत्वकाक्षी परियोजना ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कारीडोर (ई0डी0एफ0सी0) पर अमृतसर-दिल्ली-कोलकाता इण्डस्ट्रियल कारीडोर परियोजना को विकसित किये जाने की प्रक्रिया भी प्रारम्भ हो गई है। इस परियोजना के लिये यू0पी0एस0आई0डी0सी0 को उ0प्र0 सरकार द्वारा नोडल संस्था नामित किया गया है। निगम का प्रयास है कि उद्यमियों व निेवेशकर्ताओं को समस्त सुविधायें एक साथ एवं समय से प्राप्त हो सके, जिसके लिए उनकी समस्याओं का निराकरण व उनके सुझावों पर अमल भी आवश्यक है।

मुझे आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास भी है कि पूर्व की भाँति भविष्य में भी निगम, प्रदेश सरकार की नीतियों का अनुपालन करते हुये प्रदेश में औद्योगिक विकास हेतु प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा व निगम में अधिकारियों व कर्मचारियो का पारस्परिक सहयोग और भी पल्लवित होगा।

(अमित कुमार घोष)
प्रबन्ध निदेशक